सूरह अल-काफ़िरून (अविश्वासी) — سُورَةُ الكافرون
जिसे यह भी कहा जाता है:
Qul Yā Ayyuhā al-Kāfirūn (कहो: ऐ काफ़िरो), al-Muqashqishah (शुद्ध करने वाली), al-ʿIbādah (इबादत)
3 और नाम ⧉
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قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ i
कह दो, "ऐ इनकार करनेवालो!" (१)
لَا أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ i
मैं वैसी बन्दगी नहीं करूँगा जैसी बन्दगी तुम करते हो, (२)
وَلَا أَنْتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ i
और न तुम वैसी बन्दगी करनेवाले हो जैसी बन्दगी में करता हूँ (३)
وَلَا أَنَا عَابِدٌ مَا عَبَدْتُمْ i
और न मैं वैसी बन्दगी करनेवाला हूँ जैसी बन्दगी तुमने की है (४)
وَلَا أَنْتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ i
और न तुम वैसी बन्दगी करनेवाला हुए जैसी बन्दगी मैं करता हूँ (५)
لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِيَ دِينِ i
तुम्हारे लिए तूम्हारा धर्म है और मेरे लिए मेरा धर्म!" (६)