सूरह अल-मा'ऊन (सामान्य सहायता) — سُورَةُ الماعون
जिसे यह भी कहा जाता है:
al-Dīn (धर्म), al-Takdhīb (झुठलाना), al-Yatīm (अनाथ)
1 और नाम ⧉
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أَرَأَيْتَ الَّذِي يُكَذِّبُ بِالدِّينِ i
क्या तुमने उसे देखा जो दीन को झुठलाता है? (१)
فَذَٰلِكَ الَّذِي يَدُعُّ الْيَتِيمَ i
वही तो है जो अनाथ को धक्के देता है, (२)
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ الْمِسْكِينِ i
और मुहताज के खिलाने पर नहीं उकसाता (३)
فَوَيْلٌ لِلْمُصَلِّينَ i
अतः तबाही है उन नमाज़ियों के लिए, (४)
الَّذِينَ هُمْ يُرَاءُونَ i
जो दिखावे के लिए कार्य करते हैं, (६)
وَيَمْنَعُونَ الْمَاعُونَ i
और साधारण बरतने की चीज़ भी किसी को नहीं देते (७)