सूरह अल-मर्सलात (संदेशवाहक) سُورَة المرسلات

सूरह अल-मर्सलात क़ुरआन की सत्ताहत्तरवीं सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 50 आयतें हैं और इसमें क़यामत के दिन और अल्लाह के संदेशों के बारे में चर्चा की गई है।

सूरह अल-मुरसिलात (भेजे गए) — سُورَةُ المرسلات

जिसे यह भी कहा जाता है: Wa al-Mursalāt ʿUrfā (भेजे गए क्रम में), al-ʿUrf (रीति)

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَاقِعٌ ٧ i

▶ 77:7

निस्संदेह जिसका वादा तुमसे किया जा रहा है वह निश्चित ही घटित होकर रहेगा (७)

فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ الْقَادِرُونَ ٢٣ i

▶ 77:23

फिर हमने अन्दाजा ठहराया, तो हम क्या ही अच्छा अन्दाज़ा ठहरानेवाले है (२३)

وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ شَامِخَاتٍ وَأَسْقَيْنَاكُمْ مَاءً فُرَاتًا ٢٧ i

▶ 77:27

और उसमें ऊँचे-ऊँचे पहाड़ जमाए और तुम्हें मीठा पानी पिलाया? (२७)

وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ ٣٦ i

▶ 77:36

तो कोई उज़ पेश करें, (बात यह है कि) उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है (३६)

هَٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَاكُمْ وَالْأَوَّلِينَ ٣٨ i

▶ 77:38

"यह फ़ैसले का दिन है, हमने तुम्हें भी और पहलों को भी इकट्ठा कर दिया (३८)

كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ ٤٣ i

▶ 77:43

"खाओ-पियो मज़े से, उस कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे हो।" (४३)

كُلُوا وَتَمَتَّعُوا قَلِيلًا إِنَّكُمْ مُجْرِمُونَ ٤٦ i

▶ 77:46

"खा लो और मज़े कर लो थोड़ा-सा, वास्तव में तुम अपराधी हो!" (४६)