सूरह अन-नास (मनुष्य) — سُورَةُ الناس
जिसे यह भी कहा जाता है:
Qul Aʿūdhu bi-Rabbi al-Nās (कहो: मैं इंसानों के रब की शरण लेता हूँ), al-Muʿawidhatayn (सूरत अल-फलक के साथ), al-Muqashqishatān (सूरत अल-फलक के साथ)
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ i
कहो, "मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की (१)
مَلِكِ النَّاسِ i
मनुष्यों के सम्राट की (२)
إِلَٰهِ النَّاسِ i
मनुष्यों के उपास्य की (३)
مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ i
वसवसा डालनेवाले, खिसक जानेवाले की बुराई से (४)
الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ i
जो मनुष्यों के सीनों में वसवसा डालता हैं (५)
مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ i
जो जिन्नों में से भी होता हैं और मनुष्यों में से भी (६)