सूरह अल-फातिहा (आरंभ) سُورَة الفاتحة

सूरह अल-फातिहा क़ुरआन की पहली सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 7 आयतें हैं और यह सबसे महत्वपूर्ण सूरह मानी जाती है, जिसे हर नमाज़ के प्रत्येक रकात में पढ़ा जाता है।

सूरह अल-फ़ातिहा (प्रारंभ) — سُورَةُ الفاتحة

जिसे यह भी कहा जाता है: Umm al-Kitāb (किताब की माँ), Umm al-Qurʾān (क़ुरआन की माँ), al-Sabʿ al-Mathānī (सात बार दोहराई जाने वाली)
21 और नाम

صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ ٧ i

1:७

उन लोगों के मार्ग पर जो तेरे कृपापात्र हुए, जो न प्रकोप के भागी हुए और न पथभ्रष्ट (७)