सूरह अल-फ़ातिहा (प्रारंभ) — سُورَةُ الفاتحة
21 और नाम ⧉
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ i
अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं। (१)
الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ i
प्रशंसा अल्लाह ही के लिए हैं जो सारे संसार का रब हैं (२)
الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ i
बड़ा कृपालु, अत्यन्त दयावान हैं (३)
مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ i
बदला दिए जाने के दिन का मालिक हैं (४)
إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ i
हम तेरी बन्दगी करते हैं और तुझी से मदद माँगते हैं (५)
اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ i
हमें सीधे मार्ग पर चला (६)
صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ i
उन लोगों के मार्ग पर जो तेरे कृपापात्र हुए, जो न प्रकोप के भागी हुए और न पथभ्रष्ट (७)