सूरह अल-आदियात (तेज़ गति से दौड़ने वाले) — سُورَةُ العاديات
وَالْعَادِيَاتِ ضَبْحًا i
100:१साक्षी है जो हाँफते-फुँकार मारते हुए दौड़ते है, (१)
فَالْمُورِيَاتِ قَدْحًا i
100:२फिर ठोकरों से चिनगारियाँ निकालते है, (२)
فَالْمُغِيرَاتِ صُبْحًا i
100:३फिर सुबह सवेरे धावा मारते होते है, (३)
فَأَثَرْنَ بِهِ نَقْعًا i
100:४उसमें उठाया उन्होंने गर्द-गुबार (४)
فَوَسَطْنَ بِهِ جَمْعًا i
100:५और इसी हाल में वे दल में जा घुसे (५)
إِنَّ الْإِنْسَانَ لِرَبِّهِ لَكَنُودٌ i
100:६निस्संदेह मनुष्य अपने रब का बड़ा अकृतज्ञ हैं, (६)
وَإِنَّهُ عَلَىٰ ذَٰلِكَ لَشَهِيدٌ i
100:७और निश्चय ही वह स्वयं इसपर गवाह है! (७)
وَإِنَّهُ لِحُبِّ الْخَيْرِ لَشَدِيدٌ i
100:८और निश्चय ही वह धन के मोह में बड़ा दृढ़ है (८)
أَفَلَا يَعْلَمُ إِذَا بُعْثِرَ مَا فِي الْقُبُورِ i
100:९तो क्या वह जानता नहीं जब उगवला लिया जाएगा तो क़ब्रों में है (९)
وَحُصِّلَ مَا فِي الصُّدُورِ i
100:१०और स्पष्ट अनावृत्त कर दिया जाएगा तो कुछ सीनों में है (१०)
إِنَّ رَبَّهُمْ بِهِمْ يَوْمَئِذٍ لَخَبِيرٌ i
100:११निस्संदेह उनका रब उस दिन उनकी पूरी ख़बर रखता होगा (११)