सूरह अल-फलक (प्रभात) سُورَة الفلق

सूरह अल-फलक क़ुरआन की एकसौ तेरहवीं सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 5 आयतें हैं और इसमें अल्लाह से शरण लेने, बुराईयों से बचने और उसके रक्षा की प्रार्थना की गई है।

सूरह अल-फ़लक़ (भोर) — سُورَةُ الفلق

जिसे यह भी कहा जाता है: Qul Aʿūdhu bi-Rabbi al-Falaq (कहो: मैं सुबह के रब की शरण लेता हूँ), al-Muʿawidhatayn (सूरत अन-नास के साथ), al-Muqashqishatān (सूरत अन-नास के साथ)