सूरह अन-नबा (संदेश) سُورَة النبأ

सूरह अन-नबा क़ुरआन की अठत्तरवीं सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 40 आयतें हैं और इसमें क़यामत, पुनरुत्थान, और उसके दिन के बारे में चर्चा की गई है।

सूरह अन-नबा (समाचार) — سُورَةُ النبأ

जिसे यह भी कहा जाता है: ʿAmma Yatasāʾalūn (वे किस बारे में पूछते हैं), al-Tasāʾul (प्रश्न करना), al-Muʿṣirāt (वर्षा वाले बादल)

يَوْمَ يُنْفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا ١٨ i

78:१८

जिस दिन नरसिंघा में फूँक मारी जाएगी, तो तुम गिरोह को गिरोह चले आओगे। (१८)

فَذُوقُوا فَلَنْ نَزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا ٣٠ i

78:३०

"अब चखो मज़ा कि यातना के अतिरिक्त हम तुम्हारे लिए किसी और चीज़ में बढ़ोत्तरी नहीं करेंगे। " (३०)

لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّابًا ٣٥ i

78:३५

वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न कोई झुठलाने की बात (३५)

رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا ٣٧ i

78:३७

वह आकाशों और धरती का और जो कुछ उनके बीच है सबका रब है, अत्यन्त कृपाशील है, उसके सामने बात करना उनके बस में नहीं होगा (३७)

يَوْمَ يَقُومُ الرُّوحُ وَالْمَلَائِكَةُ صَفًّا ۖ لَا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ الرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَابًا ٣٨ i

78:३८

जिस दिन रूह और फ़रिश्ते पक्तिबद्ध खड़े होंगे, वे बोलेंगे नहीं, सिवाय उस व्यक्ति के जिसे रहमान अनुमति दे और जो ठीक बात कहे (३८)

ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الْحَقُّ ۖ فَمَنْ شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ مَآبًا ٣٩ i

78:३९

वह दिन सत्य है। अब जो कोई चाहे अपने रब की ओर रुज करे (३९)

إِنَّا أَنْذَرْنَاكُمْ عَذَابًا قَرِيبًا يَوْمَ يَنْظُرُ الْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ الْكَافِرُ يَا لَيْتَنِي كُنْتُ تُرَابًا ٤٠ i

78:४०

हमने तुम्हें निकट आ लगी यातना से सावधान कर दिया है। जिस दिन मनुष्य देख लेगा जो कुछ उसके हाथों ने आगे भेजा, और इनकार करनेवाला कहेगा, "ऐ काश! कि मैं मिट्टी होता!" (४०)