सूरह का नाम سُورَة النازعات

सूरह का विवरण

सूरह अन-नाज़ियात (खींचने वाले) — سُورَةُ النازعات

जिसे यह भी कहा जाता है: al-Sāhirah (धरती की सतह), al-Ṭāmmah (महान विपत्ति)

يَقُولُونَ أَإِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِي الْحَافِرَةِ ١٠ i

79:१०

वे कहते है, "क्या वास्तव में हम पहली हालत में फिर लौटाए जाएँगे? (१०)

فَأَخَذَهُ اللَّهُ نَكَالَ الْآخِرَةِ وَالْأُولَىٰ ٢٥ i

79:२५

अन्ततः अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की शिक्षाप्रद यातना में पकड़ लिया (२५)

أَأَنْتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ السَّمَاءُ ۚ بَنَاهَا ٢٧ i

79:२७

क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन कार्य है या आकाश को? अल्लाह ने उसे बनाया, (२७)

وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَاهَا ٢٩ i

79:२९

और उसकी रात को अन्धकारमय बनाया और उसका दिवस-प्रकाश प्रकट किया (२९)

وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ وَنَهَى النَّفْسَ عَنِ الْهَوَىٰ ٤٠ i

79:४०

और रहा वह व्यक्ति जिसने अपने रब के सामने खड़े होने का भय रखा और अपने जी को बुरी इच्छा से रोका, (४०)

يَسْأَلُونَكَ عَنِ السَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَاهَا ٤٢ i

79:४२

वे तुमसे उस घड़ी के विषय में पूछते है कि वह कब आकर ठहरेगी? (४२)

كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوا إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَاهَا ٤٦ i

79:४६

जिस दिन वे उसे देखेंगे तो (ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) बस एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे है (४६)