सूरह अल-इन्शिकाक (विभाजन) سُورَة الإنشقاق

सूरह अल-इन्शिकाक क़ुरआन की चुरासीवीं सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 25 आयतें हैं और इसमें क़यामत के दिन आकाश के फटने, और न्याय के बारे में चर्चा की गई है।

सूरह अल-इन्शिक़ाक (विदीर्ण होना) — سُورَةُ الإنشقاق

जिसे यह भी कहा जाता है: Idhā al-Samāʾu Inshaqqat (जब आकाश फट जाएगा), Inshaqqat (जब वह फट जाएगा)

يَا أَيُّهَا الْإِنْسَانُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًا فَمُلَاقِيهِ ٦ i

84:६

ऐ मनुष्य! तू मशक़्क़त करता हुआ अपने रब ही की ओर खिंचा चला जा रहा है और अन्ततः उससे मिलने वाला है (६)

وَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ وَرَاءَ ظَهْرِهِ ١٠ i

84:१०

और रह वह व्यक्ति जिसका कर्म-पत्र (उसके बाएँ हाथ में) उसकी पीठ के पीछे से दिया गया, (१०)

وَإِذَا قُرِئَ عَلَيْهِمُ الْقُرْآنُ لَا يَسْجُدُونَ ۩ ٢١ i

84:२१

और जब उन्हें कुरआन पढ़कर सुनाया जाता है तो सजदे में नहीं गिर पड़ते? (२१)

وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ ٢٣ i

84:२३

हालाँकि जो कुछ वे अपने अन्दर एकत्र कर रहे है, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है (२३)

إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ ٢٥ i

84:२५

अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए कभी न समाप्त॥ होनेवाला प्रतिदान है (२५)