सूरह अत-तारीक़ (रात्रिकालीन आगंतुक) — سُورَةُ الطارق
وَالسَّمَاءِ وَالطَّارِقِ i
▶ 86:1साक्षी है आकाश, और रात में प्रकट होनेवाला - (१)
وَمَا أَدْرَاكَ مَا الطَّارِقُ i
▶ 86:2और तुम क्या जानो कि रात में प्रकट होनेवाला क्या है? (२)
النَّجْمُ الثَّاقِبُ i
▶ 86:3दमकता हुआ तारा! - (३)
إِنْ كُلُّ نَفْسٍ لَمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌ i
▶ 86:4कि हर एक व्यक्ति पर एक निगरानी करनेवाला नियुक्त है (४)
فَلْيَنْظُرِ الْإِنْسَانُ مِمَّ خُلِقَ i
▶ 86:5अतः मनुष्य को चाहिए कि देखे कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है (५)
خُلِقَ مِنْ مَاءٍ دَافِقٍ i
▶ 86:6एक उछलते पानी से पैदा किया गया है, (६)
يَخْرُجُ مِنْ بَيْنِ الصُّلْبِ وَالتَّرَائِبِ i
▶ 86:7जो पीठ और पसलियों के मध्य से निकलता है (७)
إِنَّهُ عَلَىٰ رَجْعِهِ لَقَادِرٌ i
▶ 86:8निश्चय ही वह उसके लौटा देने की सामर्थ्य रखता है (८)
يَوْمَ تُبْلَى السَّرَائِرُ i
▶ 86:9जिस दिन छिपी चीज़ें परखी जाएँगी, (९)
فَمَا لَهُ مِنْ قُوَّةٍ وَلَا نَاصِرٍ i
▶ 86:10तो उस समय उसके पास न तो अपनी कोई शक्ति होगी और न कोई सहायक (१०)
وَالسَّمَاءِ ذَاتِ الرَّجْعِ i
▶ 86:11साक्षी है आवर्तन (उलट-फेर) वाला आकाश, (११)
وَالْأَرْضِ ذَاتِ الصَّدْعِ i
▶ 86:12और फट जानेवाली धरती (१२)
إِنَّهُ لَقَوْلٌ فَصْلٌ i
▶ 86:13वह दो-टूक बात है, (१३)
وَمَا هُوَ بِالْهَزْلِ i
▶ 86:14वह कोई हँसी-मज़ाक नही है (१४)
إِنَّهُمْ يَكِيدُونَ كَيْدًا i
▶ 86:15वे एक चाल चल रहे है, (१५)
وَأَكِيدُ كَيْدًا i
▶ 86:16और मैं भी एक चाल चल रहा हूँ (१६)
فَمَهِّلِ الْكَافِرِينَ أَمْهِلْهُمْ رُوَيْدًا i
▶ 86:17अत मुहलत दे दो उन इनकार करनेवालों को; मुहलत दे दो उन्हें थोड़ी-सी (१७)