सूरह अल-फ़ज्र (सवेरा) سُورَة الفجر

सूरह अल-फ़ज्र क़ुरआन की नवासीवीं सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 30 आयतें हैं और इसमें क़यामत के दिन और उसके परिणामों, साथ ही सत्य और असत्य के संघर्ष पर चर्चा की गई है।

सूरह अल-फ़ज्र (प्रभात) — سُورَةُ الفجر

فَأَمَّا الْإِنْسَانُ إِذَا مَا ابْتَلَاهُ رَبُّهُ فَأَكْرَمَهُ وَنَعَّمَهُ فَيَقُولُ رَبِّي أَكْرَمَنِ ١٥ i

89:१५

किन्तु मनुष्य का हाल यह है कि जब उसका रब इस प्रकार उसकी परीक्षा करता है कि उसे प्रतिष्ठा और नेमत प्रदान करता है, तो वह कहता है, "मेरे रब ने मुझे प्रतिष्ठित किया।" (१५)

وَأَمَّا إِذَا مَا ابْتَلَاهُ فَقَدَرَ عَلَيْهِ رِزْقَهُ فَيَقُولُ رَبِّي أَهَانَنِ ١٦ i

89:१६

किन्तु जब कभी वह उसकी परीक्षा इस प्रकार करता है कि उसकी रोज़ी नपी-तुली कर देता है, तो वह कहता है, "मेरे रब ने मेरा अपमान किया।" (१६)

وَجَاءَ رَبُّكَ وَالْمَلَكُ صَفًّا صَفًّا ٢٢ i

89:२२

और तुम्हारा रब और फ़रिश्ता (बन्दों की) एक-एक पंक्ति के पास आएगा, (२२)

وَجِيءَ يَوْمَئِذٍ بِجَهَنَّمَ ۚ يَوْمَئِذٍ يَتَذَكَّرُ الْإِنْسَانُ وَأَنَّىٰ لَهُ الذِّكْرَىٰ ٢٣ i

89:२३

और जहन्नम को उस दिन लाया जाएगा, उस दिन मनुष्य चेतेगा, किन्तु कहाँ है उसके लिए लाभप्रद उस समय का चेतना? (२३)

يَقُولُ يَا لَيْتَنِي قَدَّمْتُ لِحَيَاتِي ٢٤ i

89:२४

वह कहेगा, "ऐ काश! मैंने अपने जीवन के लिए कुछ करके आगे भेजा होता।" (२४)

ارْجِعِي إِلَىٰ رَبِّكِ رَاضِيَةً مَرْضِيَّةً ٢٨ i

89:२८

लौट अपने रब की ओर, इस तरह कि तू उससे राज़ी है वह तुझसे राज़ी है। अतः मेरे बन्दों में सम्मिलित हो जा। - (२८)