सूरह अल-लैल (रात्रि) سُورَة الليل

सूरह अल-लैल क़ुरआन की बानवेवीं सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 21 आयतें हैं और इसमें रात, दिन, और उनके प्रभाव के बारे में चर्चा की गई है।

सूरह अल-लैल (रात्रि) — سُورَةُ الليل

जिसे यह भी कहा जाता है: Wa-al-Layli Idhā Yaghshā (रात की क़सम जब वह ढक लेती है)

فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْعُسْرَىٰ ١٠ i

92:१०

हम उसे सहज ढंग से उस चीज़ का पात्र बना देंगे, जो कठिन चीज़ (कष्ट-साध्य) है (१०)

وَمَا يُغْنِي عَنْهُ مَالُهُ إِذَا تَرَدَّىٰ ١١ i

92:११

और उसका माल उसके कुछ काम न आएगा, जब वह (सिर के बल) खड्ड में गिरेगा (११)

وَمَا لِأَحَدٍ عِنْدَهُ مِنْ نِعْمَةٍ تُجْزَىٰ ١٩ i

92:१९

और हाल यह है कि किसी का उसपर उपकार नहीं कि उसका बदला दिया जा रहा हो, (१९)

إِلَّا ابْتِغَاءَ وَجْهِ رَبِّهِ الْأَعْلَىٰ ٢٠ i

92:२०

बल्कि इससे अभीष्ट केवल उसके अपने उच्च रब के मुख (प्रसन्नता) की चाह है (२०)