सूरह अल-लैल (रात्रि) — سُورَةُ الليل
وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰ i
▶ 92:1साक्षी है रात जबकि वह छा जाए, (१)
وَالنَّهَارِ إِذَا تَجَلَّىٰ i
▶ 92:2और दिन जबकि वह प्रकाशमान हो, (२)
وَمَا خَلَقَ الذَّكَرَ وَالْأُنْثَىٰ i
▶ 92:3और नर और मादा का पैदा करना, (३)
إِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتَّىٰ i
▶ 92:4कि तुम्हारा प्रयास भिन्न-भिन्न है (४)
فَأَمَّا مَنْ أَعْطَىٰ وَاتَّقَىٰ i
▶ 92:5तो जिस किसी ने दिया और डर रखा, (५)
وَصَدَّقَ بِالْحُسْنَىٰ i
▶ 92:6और अच्छी चीज़ की पुष्टि की, (६)
فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْيُسْرَىٰ i
▶ 92:7हम उस सहज ढंग से उस चीज का पात्र बना देंगे, जो सहज और मृदुल (सुख-साध्य) है (७)
وَأَمَّا مَنْ بَخِلَ وَاسْتَغْنَىٰ i
▶ 92:8रहा वह व्यक्ति जिसने कंजूसी की और बेपरवाही बरती, (८)
وَكَذَّبَ بِالْحُسْنَىٰ i
▶ 92:9और अच्छी चीज़ को झुठला दिया, (९)
فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْعُسْرَىٰ i
▶ 92:10हम उसे सहज ढंग से उस चीज़ का पात्र बना देंगे, जो कठिन चीज़ (कष्ट-साध्य) है (१०)
وَمَا يُغْنِي عَنْهُ مَالُهُ إِذَا تَرَدَّىٰ i
▶ 92:11और उसका माल उसके कुछ काम न आएगा, जब वह (सिर के बल) खड्ड में गिरेगा (११)
إِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدَىٰ i
▶ 92:12निस्संदेह हमारे ज़िम्मे है मार्ग दिखाना (१२)
وَإِنَّ لَنَا لَلْآخِرَةَ وَالْأُولَىٰ i
▶ 92:13और वास्तव में हमारे अधिकार में है आख़िरत और दुनिया भी (१३)
فَأَنْذَرْتُكُمْ نَارًا تَلَظَّىٰ i
▶ 92:14अतः मैंने तुम्हें दहकती आग से सावधान कर दिया (१४)
لَا يَصْلَاهَا إِلَّا الْأَشْقَى i
▶ 92:15इसमें बस वही पड़ेगा जो बड़ा ही अभागा होगा, (१५)
الَّذِي كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ i
▶ 92:16जिसने झुठलाया और मुँह फेरा (१६)
وَسَيُجَنَّبُهَا الْأَتْقَى i
▶ 92:17और उससे बच जाएगा वह अत्यन्त परहेज़गार व्यक्ति, (१७)
الَّذِي يُؤْتِي مَالَهُ يَتَزَكَّىٰ i
▶ 92:18जो अपना माल देकर अपने आपको निखारता है (१८)
وَمَا لِأَحَدٍ عِنْدَهُ مِنْ نِعْمَةٍ تُجْزَىٰ i
▶ 92:19और हाल यह है कि किसी का उसपर उपकार नहीं कि उसका बदला दिया जा रहा हो, (१९)
إِلَّا ابْتِغَاءَ وَجْهِ رَبِّهِ الْأَعْلَىٰ i
▶ 92:20बल्कि इससे अभीष्ट केवल उसके अपने उच्च रब के मुख (प्रसन्नता) की चाह है (२०)
وَلَسَوْفَ يَرْضَىٰ i
▶ 92:21और वह शीघ्र ही राज़ी हो जाएगा (२१)