सूरह अश-शरह (ह्रदय का विस्तार) — سُورَةُ الشرح
जिसे यह भी कहा जाता है:
Alam Nashraḥ (क्या हमने नहीं खोला), al-Inshirāḥ (विस्तार)
أَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَ i
94:१क्या ऐसा नहीं कि हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए खोल दिया? (१)
وَوَضَعْنَا عَنْكَ وِزْرَكَ i
94:२और तुमपर से तुम्हारा बोझ उतार दिया, (२)
الَّذِي أَنْقَضَ ظَهْرَكَ i
94:३जो तुम्हारी कमर तोड़े डाल रहा था? (३)
وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَ i
94:४और तुम्हारे लिए तुम्हारे ज़िक्र को ऊँचा कर दिया? (४)
فَإِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا i
94:५अतः निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी भी है (५)
إِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا i
94:६निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी भी है (६)
فَإِذَا فَرَغْتَ فَانْصَبْ i
94:७अतः जब निवृत हो तो परिश्रम में लग जाओ, (७)
وَإِلَىٰ رَبِّكَ فَارْغَبْ i
94:८और अपने रब से लौ लगाओ (८)