सूरह अत-तीन (अंजीर) سُورَة التين

सूरह अत-तीन क़ुरआन की पचानवेवीं सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 8 आयतें हैं और इसमें मानवता, अच्छे कर्म और विश्वास के बारे में चर्चा की गई है।

सूरह अत-तीन (अंजीर) — سُورَةُ التين

जिसे यह भी कहा जाता है: Wa al-Tīn wa al-Zaytūn (अंजीर और जैतून की क़सम)

لَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنْسَانَ فِي أَحْسَنِ تَقْوِيمٍ ٤ i

95:४

निस्संदेह हमने मनुष्य को सर्वोत्तम संरचना के साथ पैदा किया (४)

ثُمَّ رَدَدْنَاهُ أَسْفَلَ سَافِلِينَ ٥ i

95:५

फिर हमने उसे निकृष्टतम दशा की ओर लौटा दिया, जबकि वह स्वयं गिरनेवाला बना (५)

إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ ٦ i

95:६

सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और जिन्होंने अच्छे कर्म किए, तो उनके लिए कभी न समाप्त होनेवाला बदला है (६)