सूरह अल-अलक (खून का थक्का) — سُورَةُ العلق
اقْرَأْ بِاسْمِ رَبِّكَ الَّذِي خَلَقَ i
▶ 96:1पढ़ो, अपने रब के नाम के साथ जिसने पैदा किया, (१)
خَلَقَ الْإِنْسَانَ مِنْ عَلَقٍ i
▶ 96:2पैदा किया मनुष्य को जमे हुए ख़ून के एक लोथड़े से (२)
اقْرَأْ وَرَبُّكَ الْأَكْرَمُ i
▶ 96:3पढ़ो, हाल यह है कि तुम्हारा रब बड़ा ही उदार है, (३)
الَّذِي عَلَّمَ بِالْقَلَمِ i
▶ 96:4जिसने क़लम के द्वारा शिक्षा दी, (४)
عَلَّمَ الْإِنْسَانَ مَا لَمْ يَعْلَمْ i
▶ 96:5मनुष्य को वह ज्ञान प्रदान किया जिस वह न जानता था (५)
كَلَّا إِنَّ الْإِنْسَانَ لَيَطْغَىٰ i
▶ 96:6कदापि नहीं, मनुष्य सरकशी करता है, (६)
أَنْ رَآهُ اسْتَغْنَىٰ i
▶ 96:7इसलिए कि वह अपने आपको आत्मनिर्भर देखता है (७)
إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ الرُّجْعَىٰ i
▶ 96:8निश्चय ही तुम्हारे रब ही की ओर पलटना है (८)
أَرَأَيْتَ الَّذِي يَنْهَىٰ i
▶ 96:9क्या तुमने देखा उस व्यक्ति को (९)
عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰ i
▶ 96:10जो एक बन्दे को रोकता है, जब वह नमाज़ अदा करता है? - (१०)
أَرَأَيْتَ إِنْ كَانَ عَلَى الْهُدَىٰ i
▶ 96:11तुम्हारा क्या विचार है? यदि वह सीधे मार्ग पर हो, (११)
أَوْ أَمَرَ بِالتَّقْوَىٰ i
▶ 96:12या परहेज़गारी का हुक्म दे (उसके अच्छा होने में क्या संदेह है) (१२)
أَرَأَيْتَ إِنْ كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ i
▶ 96:13तुम्हारा क्या विचार है? यदि उस (रोकनेवाले) ने झुठलाया और मुँह मोड़ा (तो उसके बुरा होने में क्या संदेह है) - (१३)
أَلَمْ يَعْلَمْ بِأَنَّ اللَّهَ يَرَىٰ i
▶ 96:14क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है? (१४)
كَلَّا لَئِنْ لَمْ يَنْتَهِ لَنَسْفَعًا بِالنَّاصِيَةِ i
▶ 96:15कदापि नहीं, यदि वह बाज़ न आया तो हम चोटी पकड़कर घसीटेंगे, (१५)
نَاصِيَةٍ كَاذِبَةٍ خَاطِئَةٍ i
▶ 96:16झूठी, ख़ताकार चोटी (१६)
فَلْيَدْعُ نَادِيَهُ i
▶ 96:17अब बुला ले वह अपनी मजलिस को! (१७)
سَنَدْعُ الزَّبَانِيَةَ i
▶ 96:18हम भी बुलाए लेते है सिपाहियों को (१८)
كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَاسْجُدْ وَاقْتَرِبْ ۩ i
▶ 96:19कदापि नहीं, उसकी बात न मानो और सजदे करते और क़रीब होते रहो (१९)