सूरह अल-क़द्र (संप्रभुता) سُورَة القدر

सूरह अल-क़द्र क़ुरआन की सत्तानवेवीं सूरह है, जो मक्का में अवतरित हुई। इसमें 5 आयतें हैं और इसमें क़यामत की रात, उसके प्रभाव और अल्लाह की असीम शक्ति के बारे में चर्चा की गई है।

सूरह अल-क़द्र (मूल्य / नियति) — سُورَةُ القدر

जिसे यह भी कहा जाता है: Innā Anzalnāhu fī Laylat al-Qadr (निस्संदेह हमने इसे क़द्र की रात में उतारा)

تَنَزَّلُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِمْ مِنْ كُلِّ أَمْرٍ ٤ i

97:४

उसमें फ़रिश्तें और रूह हर महत्वपूर्ण मामलें में अपने रब की अनुमति से उतरते है (४)