निश्चय ही अल्लाह न्याय का और भलाई का और नातेदारों को (उनके हक़) देने का आदेश देता है और अश्लीलता, बुराई और सरकशी से रोकता है। वह तुम्हें नसीहत करता है, ताकि तुम ध्यान दो अन-नहल १६:९० ⧉
तफ़सीर:
अल्लाह अपने बंदों को न्याय का आदेश देता है कि बंदा अल्लाह के हक़ और बंदों के हक़ अदा करे और निर्णय करते समय बिना औचित्य के किसी को किसी पर वरीयता न दे। तथा वह उपकार का आदेश देता है कि बंदा अनुग्रह करते हुए ऐसे कार्य करे, जिसके लिए वह बाध्य नहीं है, जैसे कि स्वेच्छा से खर्च करना और अत्याचारी को क्षमा कर देना। और रिश्तेदारों को उनकी आवश्यकता की चीज़ें देने का आदेश देता है। और हर बुरी चीज़ से रोकता है, चाहे उसका संबंध बात से हो, जैसे- गंदी बात कहना या कार्य से, जैसे- व्यभिचार। और उससे रोकता है, जो शरीयत की नज़र में नापसंदीदा है और इसमें सारे पाप शामिल हैं। और अत्याचार तथा अहंकार से रोकता है। अल्लाह ने इस आयत में तुम्हें जिन बातों का आदेश दिया है और जिन कार्यों से रोका है, उनके निष्पादन का तुम्हें उपदेश देता है। इस उम्मीद में कि तुम उसके उपदेश पर ध्यान दो।