Landscape MP4 Vertical MP4

सूरह अल-इसरा — आयत 60 (हिन्दी) — वीडियो

अल-इसरा • आयत 60 में से 111 • हिन्दी


وَإِذْ قُلْنَا لَكَ إِنَّ رَبَّكَ أَحَاطَ بِالنَّاسِ ۚ وَمَا جَعَلْنَا الرُّؤْيَا الَّتِي أَرَيْنَاكَ إِلَّا فِتْنَةً لِلنَّاسِ وَالشَّجَرَةَ الْمَلْعُونَةَ فِي الْقُرْآنِ ۚ وَنُخَوِّفُهُمْ فَمَا يَزِيدُهُمْ إِلَّا طُغْيَانًا كَبِيرًا 60
अनुवाद:
जब हमने तुमसे कहा, "तुम्हारे रब ने लोगों को अपने घेरे में ले रखा है और जो अलौकिक दर्शन हमने तुम्हें कराया उसे तो हमने लोगों के लिए केवल एक आज़माइश बना दिया और उस वृक्ष को भी जिसे क़ुरआन में तिरस्कृत ठहराया गया है। हम उन्हें डराते है, किन्तु यह चीज़ उनकी बढ़ी हुई सरकशी ही को बढ़ा रही है।" अल-इसरा १७:६०
तफ़सीर:
और (ऐ रसूल!) आप उस समय को याद कीजिए, जब हमने आपसे कहा था : निःसंदेह आपके पालनहार ने लोगों को अपनी शक्ति से घेर लिया है। इसलिए वे उसके क़ब्ज़े में हैं और अल्लाह आपकी उनसे रक्षा करने वाला है। अतः आप उस बात का प्रचार करें जिसके प्रचार का आपको आदेश दिया गया है। और हमने इस्रा (व मेराज) की रात आपको खुली आँखों जो कुछ दिखाया, उसे लोगों के लिए परीक्षण का विषय बना दिया कि क्या वे उसे मानते हैं या उसे झुठला देते हैं? तथा क़ुरआन में उल्लेख किया गया ज़क़्क़ूम का वृक्ष कि वह जहन्नम की गहराई में उगता है, हमने उसे उनके लिए मात्र एक परीक्षण बनाया है। अगर वे इन दोनों निशानियों को नहीं मानते, तो वे उनके अलावा अन्य निशानियों को कभी नहीं मानेंगे। हम निशानियाँ उतारकर उन्हें डराते हैं, परंतु इससे उनके कुफ़्र ही में वृद्धि होती है और वे गुमराही में बहुत दूर चले जाते हैं।
X Facebook Minutemailer Stellar WhatsApp Reddit
पूरी सूरह का वीडियो देखें
पूर्व अल-इसरा • आयत 59 अगला अल-इसरा • आयत 61