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सूरह अल-बकरा — आयत 18 (हिन्दी) — वीडियो

अल-बकरा • आयत 18 में से 286 • हिन्दी


صُمٌّ بُكْمٌ عُمْيٌ فَهُمْ لَا يَرْجِعُونَ 18
अनुवाद:
वे बहरे हैं, गूँगें हैं, अन्धे हैं, अब वे लौटने के नहीं अल-बकरा २:१८
तफ़सीर:
वे बहरे हैं, सत्य को स्वीकार करने की नीयत से नहीं सुनते। वे गूँगे हैं, सत्य नहीं बोलते हैं। (वे) सत्य को देखने से अंधे हैं। इसलिए वे अपनी पथभ्रष्टता से वापस नहीं लौटते।
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