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सूरह अल-बकरा — आयत 25 (हिन्दी) — वीडियो

अल-बकरा • आयत 25 में से 286 • हिन्दी


وَبَشِّرِ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ كُلَّمَا رُزِقُوا مِنْهَا مِنْ ثَمَرَةٍ رِزْقًا ۙ قَالُوا هَٰذَا الَّذِي رُزِقْنَا مِنْ قَبْلُ ۖ وَأُتُوا بِهِ مُتَشَابِهًا ۖ وَلَهُمْ فِيهَا أَزْوَاجٌ مُطَهَّرَةٌ ۖ وَهُمْ فِيهَا خَالِدُونَ 25
अनुवाद:
जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उन्हें शुभ सूचना दे दो कि उनके लिए ऐसे बाग़ है जिनके नीचे नहरें बह रहीं होगी; जब भी उनमें से कोई फल उन्हें रोजी के रूप में मिलेगा, तो कहेंगे, "यह तो वही हैं जो पहले हमें मिला था," और उन्हें मिलता-जुलता ही (फल) मिलेगा; उनके लिए वहाँ पाक-साफ़ पत्नि याँ होगी, और वे वहाँ सदैव रहेंगे अल-बकरा २:२५
तफ़सीर:
अगर पिछली धमकी काफ़िरों के लिए थी; तो - ऐ नबी - आप सत्कर्म करने वाले मोमिनों को ऐसे बाग़ों की शुभ सूचना दे दें, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे नहरें बहती हैं। जब भी उन्हें उन बाग़ों के स्वादिष्ट फलों में से कोई फल दिया जाएगा, तो दुनिया के फलों से बिलकुल मिलता-जुलता होने के कारण वे कहेंगे : ये तो बिलकुल वैसे ही फल हैं, जो हमें पहले दिए गए थे। दरअसल उन्हें आकार तथा नाम में समरूप फल इसलिए दिए जाएँगे, ताकि जाने पहचाने फल होने के कारण, दिल उन्हें स्वीकार कर लें। लेकिन वे अपने स्वाद और ज़ायक़े में भिन्न होंगे। उनके लिए जन्नत में ऐसी पत्नियाँ होंगी, जो दुनिया के लोगों में कल्पना की जाने वाली हर उस चीज़ से पवित्र होंगी, जिससे मन भागता है और मानव स्वभाव घृणा करता है। वे दुनिया की बाधित होने वाली नेमतों के विपरीत, हमेशा बाक़ी रहने वाली नेमतों में होंगे, जो कभी ख़त्म नहीं होंगी।
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