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सूरह अल-फुरक़ान — आयत 27 (हिन्दी) — वीडियो

अल-फुरक़ान • आयत 27 में से 77 • हिन्दी


وَيَوْمَ يَعَضُّ الظَّالِمُ عَلَىٰ يَدَيْهِ يَقُولُ يَا لَيْتَنِي اتَّخَذْتُ مَعَ الرَّسُولِ سَبِيلًا 27
अनुवाद:
उस दिन अत्याचारी अत्याचारी अपने हाथ चबाएगा। कहेंगा, "ऐ काश! मैंने रसूल के साथ मार्ग अपनाया होता! अल-फुरक़ान २५:२७
तफ़सीर:
और (ऐ रसूल!) उस दिन को याद करें, जिस दिन अत्याचारी रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण न करने के कारण, घोर पछतावे से अपने दोनों हाथ चबाएगा और कहेगा : ऐ काश! मैंने रसूल का उस चीज़ में पालन किया होता जो कुछ वह अपने पालनहार की ओर से लाए थे और उसके साथ उद्धार का मार्ग अपनाया होता।
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