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सूरह अल-फुरक़ान — आयत 42 (हिन्दी) — वीडियो

अल-फुरक़ान • आयत 42 में से 77 • हिन्दी


إِنْ كَادَ لَيُضِلُّنَا عَنْ آلِهَتِنَا لَوْلَا أَنْ صَبَرْنَا عَلَيْهَا ۚ وَسَوْفَ يَعْلَمُونَ حِينَ يَرَوْنَ الْعَذَابَ مَنْ أَضَلُّ سَبِيلًا 42
अनुवाद:
इसने तो हमें भटकाकर हमको हमारे प्रभु-पूज्यों से फेर ही दिया होता, यदि हम उनपर मज़बूती से जम न गए होते।" अल-फुरक़ान २५:४२
तफ़सीर:
निश्चय यह हमें हमारे देवताओं की पूजा करने से दूर करने वाला था। यदि हम उनकी पूजा करने पर जमे न रहते, तो वह अपने तर्कों और सबूतों के साथ हमें उससे दूर कर देता। तथा जब वे अपनी क़ब्रों में और क़ियामत के दिन अज़ाब देखेंगे, तो जान लेंगे कि कौन सबसे अधिक रास्ते से भटका हुआ था? क्या वे लोग का अथवा रसूल? तथा यह भी जान लेंगे कि उनमें से कौन सबसे ज़्यादा गुमराह था।
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