{अलिफ़, लाम, मीम} इन्हें 'ह़ुरूफ़े मुक़त्तआत' कहा जाता है। इनके समान अक्षर सूरतुल-बक़रा के शुरू में भी आए हैं। ये इस प्रकार का क़ुरआन लाने में अरबों की अक्षमता को इंगित करते हैं, हालाँकि पूरा क़ुरआन उन्हीं जैसे अक्षरों से बना है, जो इस सूरत के आरंभ में आए हैं और जिनसे वे अपने शब्दों का निर्माण करते हैं।