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सूरह आल-इमरान — आयत 146 (हिन्दी) — वीडियो

आल-इमरान • आयत 146 में से 200 • हिन्दी


وَكَأَيِّنْ مِنْ نَبِيٍّ قَاتَلَ مَعَهُ رِبِّيُّونَ كَثِيرٌ فَمَا وَهَنُوا لِمَا أَصَابَهُمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَمَا ضَعُفُوا وَمَا اسْتَكَانُوا ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ الصَّابِرِينَ 146
अनुवाद:
कितने ही नबी ऐसे गुज़रे है जिनके साथ होकर बहुत-से ईशभक्तों ने युद्ध किया, तो अल्लाह के मार्ग में जो मुसीबत उन्हें पहुँची उससे वे न तो हताश हुए और न उन्होंने कमज़ोरी दिखाई और न ऐसा हुआ कि वे दबे हो। और अल्लाह दृढ़तापूर्वक जमे रहनेवालों से प्रेम करता है आल-इमरान ३:१४६
तफ़सीर:
और अल्लाह के नबियों में से कितने ही नबी ऐसे हैं, जिनके साथ मिलकर उनके अनुयायियों में से अनेक समूहों ने लड़ाई लड़ी। तो वे अल्लाह के रास्ते में पहुँचने वाली हत्या और घाव के कारण जिहाद से कायर नहीं हुए और न वे दुश्मन से लड़ने में कमज़ोर पड़े और न उनके सामने घुटने टेके। बल्कि उन्होंने धैर्य से काम लिया और डटे रहे। और अल्लाह अपने रास्ते में कष्टों और कठिनाइयों पर धैर्य से काम लेने वालों से प्रेम करता है।
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