जो नमाज़ का आयोजन करते है और ज़कात देते है और आख़िरत पर विश्वास रखते है लुक़मान ३१:४ ⧉
तफ़सीर:
जो सम्पूर्ण रूप से नमाज़ अदा करते हैं, अपने धनों की ज़कात देते हैं तथा वे आख़िरत में पेश आने वाली घटनाओं : पुनर्जीवन, हिसाब, पुण्य और दंड पर विश्वास रखते हैंl