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सूरह लुक़मान — आयत 4 (हिन्दी) — वीडियो

लुक़मान • आयत 4 में से 34 • हिन्दी


الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُمْ بِالْآخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ 4
अनुवाद:
जो नमाज़ का आयोजन करते है और ज़कात देते है और आख़िरत पर विश्वास रखते है लुक़मान ३१:४
तफ़सीर:
जो सम्पूर्ण रूप से नमाज़ अदा करते हैं, अपने धनों की ज़कात देते हैं तथा वे आख़िरत में पेश आने वाली घटनाओं : पुनर्जीवन, हिसाब, पुण्य और दंड पर विश्वास रखते हैंl
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