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सूरह अल-अहज़ाब — आयत 55 (हिन्दी) — वीडियो

अल-अहज़ाब • आयत 55 में से 73 • हिन्दी


لَا جُنَاحَ عَلَيْهِنَّ فِي آبَائِهِنَّ وَلَا أَبْنَائِهِنَّ وَلَا إِخْوَانِهِنَّ وَلَا أَبْنَاءِ إِخْوَانِهِنَّ وَلَا أَبْنَاءِ أَخَوَاتِهِنَّ وَلَا نِسَائِهِنَّ وَلَا مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُنَّ ۗ وَاتَّقِينَ اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدًا 55
अनुवाद:
न उनके लिए अपने बापों के सामने होने में कोई दोष है और न अपने बेटों, न अपने भाइयों, न अपने भतीजों, न अपने भांजो, न अपने मेल की स्त्रियों और न जिनपर उन्हें स्वामित्व का अधिकार प्राप्त हो उनके सामने होने में। अल्लाह का डर रखो, निश्चय ही अल्लाह हर चीज़ का साक्षी है अल-अहज़ाब ३३:५५
तफ़सीर:
महिलाओं पर इसमें कोई गुनाह नहीं है कि उनके पिता, उनके बच्चे, उनके भाई, उनके भतीजे और उनके भांजे, चाहे वे वंश से हों या स्तनपान से, उन्हें देखें और बिना पर्दे के उनसे बात करें। तथा उनपर इसमें कोई पाप नहीं है कि मोमिन स्त्रियाँ और उनके दास एवं दासी उनसे बिना पर्दे के बात करें। और (ऐ मोमिन स्त्रियो) अल्लाह के आदेशों और निषेधों के बारे में अल्लाह से डरती रहो। क्योंकि वह तुम्हारे सभी कथनों और कर्मों को देखने वाला है।
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