उनके पास उनके रब की आयतों में से जो आयत भी आती है, वे उससे कतराते ही है या-सिन ३६:४६ ⧉
तफ़सीर:
और जब भी इन द्वेष रखने वाले मुश्रिकों के पास अल्लाह के एकेश्वरवाद और उसके एकमात्र इबादत का हक़दार होने को दर्शाने वाली अल्लाह की आयतें आती थीं, तो वे उनसे उपदेश ग्रहण करने के बजाय उनसे मुँह फेर लेते थे।