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सूरह साद — आयत 27 (हिन्दी) — वीडियो

साद • आयत 27 में से 88 • हिन्दी


وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاءَ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا بَاطِلًا ۚ ذَٰلِكَ ظَنُّ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ فَوَيْلٌ لِلَّذِينَ كَفَرُوا مِنَ النَّارِ 27
अनुवाद:
हमने आकाश और धरती को और जो कुछ उनके बीच है, व्यर्थ नहीं पैदा किया। यह तो उन लोगों का गुमान है जिन्होंने इनकार किया। अतः आग में झोंके जाने के कारण इनकार करनेवालों की बड़ी दुर्गति है साद ३८:२७
तफ़सीर:
हमने आकाश और धरती को व्यर्थ पैदा नहीं किया। यह तो उन लोगों की सोच है, जिन्होंने कुफ़्र किया। अतः इन काफ़िरों के लिए, जो यह सोच रखते हैं, क़ियामत के दिन जहन्नम की आग के रूप में बड़ा विनाश है, अगर वे अपने कुफ़्र और अल्लाह के बारे में बुरी सोच की अवस्था ही में मर गए।
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