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सूरह अज़-ज़ुखरुफ़ — आयत 15 (हिन्दी) — वीडियो

अज़-ज़ुखरुफ़ • आयत 15 में से 89 • हिन्दी


وَجَعَلُوا لَهُ مِنْ عِبَادِهِ جُزْءًا ۚ إِنَّ الْإِنْسَانَ لَكَفُورٌ مُبِينٌ 15
अनुवाद:
उन्होंने उसके बन्दों में से कुछ को उसका अंश ठहरा दिया! निश्चय ही मनुष्य खुला कृतघ्न है अज़-ज़ुखरुफ़ ४३:१५
तफ़सीर:
मुश्रिकों ने दावा किया कि कुछ जीव महिमावान सृष्टिकर्ता (अल्लाह) से पैदा हुए हैं, जब उन्होंने कहा : फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं। निश्चय ही ऐसा कहने वाला व्यक्ति स्पष्ट कृतघ्न और गुमराह है।
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