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सूरह अल-फ़त्ह — आयत 17 (हिन्दी) — वीडियो

अल-फ़त्ह • आयत 17 में से 29 • हिन्दी


لَيْسَ عَلَى الْأَعْمَىٰ حَرَجٌ وَلَا عَلَى الْأَعْرَجِ حَرَجٌ وَلَا عَلَى الْمَرِيضِ حَرَجٌ ۗ وَمَنْ يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ يُدْخِلْهُ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ وَمَنْ يَتَوَلَّ يُعَذِّبْهُ عَذَابًا أَلِيمًا 17
अनुवाद:
न अन्धे के लिए कोई हरज है, न लँगडे के लिए कोई हरज है और न बीमार के लिए कोई हरज है। जो भी अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करेगा, उसे वह ऐसे बाग़ों में दाख़िल करके, जिनके नीचे नहरे बह रही होगी, किन्तु जो मुँह फेरेगा उसे वह दुखद यातना देगा अल-फ़त्ह ४८:१७
तफ़सीर:
जो व्यक्ति अंधापन, या लंगड़ापन, या बीमारी के कारण अक्षम है, यदि वह अल्लाह के मार्ग में लड़ने से पीछे रह गया, तो उसपर कोई पाप नहीं है। और जो अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करेगा, वह उसे ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं। और जो उन दोनों की आज्ञाकारिता से मुँह फेरेगा, अल्लाह उसे दर्दनाक अज़ाब देगा।
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