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सूरह अल-माइदा — आयत 66 (हिन्दी) — वीडियो

अल-माइदा • आयत 66 में से 120 • हिन्दी


وَلَوْ أَنَّهُمْ أَقَامُوا التَّوْرَاةَ وَالْإِنْجِيلَ وَمَا أُنْزِلَ إِلَيْهِمْ مِنْ رَبِّهِمْ لَأَكَلُوا مِنْ فَوْقِهِمْ وَمِنْ تَحْتِ أَرْجُلِهِمْ ۚ مِنْهُمْ أُمَّةٌ مُقْتَصِدَةٌ ۖ وَكَثِيرٌ مِنْهُمْ سَاءَ مَا يَعْمَلُونَ 66
अनुवाद:
और यदि वे तौरात और इनजील को और जो कुछ उनके रब की ओर से उनकी ओर उतारा गया है, उसे क़ायम रखते, तो उन्हें अपने ऊपर से भी खाने को मिलता और अपने पाँव के नीचे से भी। उनमें से एक गिरोह सीधे मार्ग पर चलनेवाला भी है, किन्तु उनमें से अधिकतर ऐसे है कि जो भी करते है बुरा होता है अल-माइदा ५:६६
तफ़सीर:
यदि यहूदी उसके अनुसार काम करते जो तौरात में है, तथा ईसाई उसके अनुसार काम करते जो इंजील में है और वे सभी उसके अनुसार काम करते जो उनपर क़ुरआन उतारा गया है - तो मैं उनके लिए बारिश उतारने और अन्न उगाने जैसे जीविका के साधन सुगम कर देता। किताब वालों में से कुछ लोग सत्य पर स्थिर मध्यम मार्ग वाले हैं। जबकि उनमें से बहुत से लोग ईमान न होने के कारण बुरे कार्य करने वाले हैं।
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