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सूरह अल-माइदा — आयत 75 (हिन्दी) — वीडियो

अल-माइदा • आयत 75 में से 120 • हिन्दी


مَا الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ إِلَّا رَسُولٌ قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِهِ الرُّسُلُ وَأُمُّهُ صِدِّيقَةٌ ۖ كَانَا يَأْكُلَانِ الطَّعَامَ ۗ انْظُرْ كَيْفَ نُبَيِّنُ لَهُمُ الْآيَاتِ ثُمَّ انْظُرْ أَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ 75
अनुवाद:
मरयम का बेटा मसीह एक रसूल के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं। उससे पहले भी बहुत-से रसूल गुज़र चुके हैं। उसकी माण अत्यन्त सत्यवती थी। दोनों ही भोजन करते थे। देखो, हम किस प्रकार उनके सामने निशानियाँ स्पष्ट करते है; फिर देखो, ये किस प्रकार उलटे फिरे जा रहे है! अल-माइदा ५:७५
तफ़सीर:
मरयम के पुत्र ईसा मसीह (अल्लाह के) रसूलों में से एक रसूल के अलावा कुछ नहीं हैं। उन्हें भी उन्हीं रसूलों की तरह मौत से गुज़रना पड़ेगा। तथा उनकी माँ मरयम - अलैहस्सलाम - बहुत सच्ची तथा अल्लाह की बातों की पुष्टि करने वाली थीं और वे दोनों ही खाना खाया करते थे, क्योंकि उन्हें इसकी आवश्यकता थी। फिर भला वे भोजन की आवश्यकता के साथ पूज्य कैसे हो सकते हैं?! (ऐ रसूल!) आप चिंतनशील दृष्टि से देखें : हम उनके लिए उन निशानियों को किस प्रकार खोल-खोलकर बयान करते हैें, जो अल्लाह के एकेश्वरवाद को दर्शाती हैं तथा अल्लाह के अलावा की ओर उलूहियत (पूज्य होने) की निस्बत करने में उनकी अतिशयोक्ति की अमान्यता को इंगित करती हैं। इसके बावजूद वे इन निशानियों की उपेक्षा करते हैं। फिर आप एक चिंतनशील दृष्टि से देखें : अल्लाह के एकत्व को दर्शाने वाली इन स्पष्ट निशानियों के बावजूद, वे किस प्रकार सत्य से पूरी तरह से फेरे जाते हैं।
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