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सूरह अर-रहमान — आयत 29 (हिन्दी) — वीडियो

अर-रहमान • आयत 29 में से 78 • हिन्दी


يَسْأَلُهُ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِي شَأْنٍ 29
अनुवाद:
आकाशों और धरती में जो भी है उसी से माँगता है। उसकी नित्य नई शान है अर-रहमान ५५:२९
तफ़सीर:
आकाशों में जो भी फ़रिश्ते हैं तथा धरती पर जो भी जिन्न और इनसान हैं, सब अपनी ज़रूरतें उसी से माँगते हैं। हर दिन वह अपने बंदों से संबंधित किसी कार्य में होता है; जैसे जीवन देना, मारना, रोज़ी देना, इत्यादि।
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