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सूरह अल-मुजादिला — आयत 13 (हिन्दी) — वीडियो

अल-मुजादिला • आयत 13 में से 22 • हिन्दी


أَأَشْفَقْتُمْ أَنْ تُقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ صَدَقَاتٍ ۚ فَإِذْ لَمْ تَفْعَلُوا وَتَابَ اللَّهُ عَلَيْكُمْ فَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ وَاللَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ 13
अनुवाद:
क्या तुम इससे डर गए कि अपनी गुप्त वार्ता से पहले सदक़े दो? जो जब तुमने यह न किया और अल्लाह ने तुम्हें क्षमा कर दिया. तो नमाज़ क़ायम करो, ज़कात देते रहो और अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है अल-मुजादिला ५८:१३
तफ़सीर:
क्या तुम रसूल से सरगोशी करने से पहले सदक़ा देने के कारण गरीबी से डर गए? सो, यदि तुमने अल्लाह के इस आदेश का पालन नहीं किया, और अल्लाह ने तुम्हें क्षमा कर दिया कि इसे छोड़ने की छूट प्रदान कर दी, तो अब तुम उत्तम तरीक़े से नमाज़ क़ायम करो, अपने धन की ज़कात दो, तथा अल्लाह एवं उसके रसूल का अनुसरण करो। अल्लाह तुम्हारे कार्यों से पूरी तरह अवगत है। उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है। और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।
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