सूरह अल-अस्र (समय — العصر) (आयत 2)

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103 अल-अस्र(العصر), आयत २

إِنَّ الْإِنْسَانَ لَفِي خُسْرٍ 2 ٢

कि वास्तव में मनुष्य घाटे में है, (२)

तफ़सीर
निश्चय इनसान हानि और तबाही में है।

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