सूरह अल-इख़्लास (निष्ठा — الإخلاص) (आयत 4)

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112 अल-इख़्लास(الإخلاص), आयत ४

وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ 4 ٤

और न कोई उसका समकक्ष है।" (४)

तफ़सीर
और उसकी मख़लूक़ में कोई भी उसके समान नहीं है।

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