सूरह अन-नास (मनुष्य — الناس) (आयत 1)

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114 अन-नास(الناس), आयत १

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ 1 ١

कहो, "मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की (१)

तफ़सीर
(ऐ रसूल) आप कह दें कि मैं लोगों के पानलहारी की पनाह लेता हूँ और उसकी शरण में आता हूँ।

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