सूरह अन-नास (मनुष्य — الناس) (आयत 4)

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114 अन-नास(الناس), आयत ४

مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ 4 ٤

वसवसा डालनेवाले, खिसक जानेवाले की बुराई से (४)

तफ़सीर
शैतान की बुराई से, जो इनसान के अल्लाह के ज़िक्र से गाफ़िल होने पर, उसके दिल में वसवसा डालने लगता है, और जब वह अल्लाह का ज़िक्र करता है, तो उससे पीछे हट जाता है।

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