सूरह इब्राहीम (إبراهيم) (आयत 24)

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14 इब्राहीम(إبراهيم), आयत २४

أَلَمْ تَرَ كَيْفَ ضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا كَلِمَةً طَيِّبَةً كَشَجَرَةٍ طَيِّبَةٍ أَصْلُهَا ثَابِتٌ وَفَرْعُهَا فِي السَّمَاءِ 24 ٢٤

क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने कैसी मिसाल पेश की? अच्छी उत्तम बात एक अच्छे शुभ वृक्ष के सदृश है, जिसकी जड़ गहरी जमी हुई हो और उसकी शाखाएँ आकाश में पहुँची हुई हों; (२४)

तफ़सीर
(ऐ रसूल) क्या आप नहीं जानते कि अल्लाह ने एकेश्वरवाद के शब्द (तौह़ीद के कलिमा) 'ला इलाहा इल्लल्लाह' का उदाहरण कैसे दिया, जब उसका उदाहरण एक पवित्र वृक्ष अर्थात् खजूर के पेड़ के साथ दिया, जिसका तना धरती के अंदर धँसा हुआ होता है, जो अपनी जड़ो के द्वारा पानी प्राप्त करता है और उसकी शाखा आकाश की ओर ऊँची होती है, ओस पीती है और अच्छी (साफ़) हवा को ग्रहण करती है।

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