सूरह इब्राहीम (إبراهيم) (आयत 30)

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14 इब्राहीम(إبراهيم), आयत ३०

وَجَعَلُوا لِلَّهِ أَنْدَادًا لِيُضِلُّوا عَنْ سَبِيلِهِ ۗ قُلْ تَمَتَّعُوا فَإِنَّ مَصِيرَكُمْ إِلَى النَّارِ 30 ٣٠

और उन्होंने अल्लाह के प्रतिद्वन्दी बना दिए, ताकि परिणामस्वरूप वे उन्हें उसके मार्ग से भटका दें। कह दो, "थोड़े दिन मज़े ले लो। अन्ततः तुम्हें आग ही की ओर जाना है।" (३०)

तफ़सीर
मुश्रिकों ने अल्लाह के साझी और समकक्ष बना लिए, ताकि खुद अल्लाह के रास्ते से भटकने के बाद अपने अनुयायियों को भी उससे भटका दें। (ऐ रसूल) आप उनसे कह दें : इस जीवन में तुम जिन इच्छाओं में व्यस्त और संदेह फैलाने में लगे हो, उनका कुछ लाभ उठा लो। क्योंकि क़ियामत के दिन तुम्हें आग (नरक) ही की ओर लौटना है, उसके अलावा तुम्हारा कोई अन्य ठिकाना नहीं है।

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