सूरह अल-हिज्र (हिज्र क्षेत्र — الحجر) (आयत 13)

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15 अल-हिज्र(الحجر), आयत १३

لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ الْأَوَّلِينَ 13 ١٣

वे इसे मानेंगे नहीं। पहले के लोगों की मिसालें गुज़र चुकी हैं (१३)

तफ़सीर
ये लोग मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतरित इस क़ुरआन पर ईमान नहीं लाएँगे। और अल्लाह की यह परंपरा रही है कि वह अपने रसूलों के लाए हुए संदेश को झुठलाने वालों को विनष्ट कर देता है। इसलिए आपको झुठलाने वाले लोगों को इससे सीख लेनी चाहिए।

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