सूरह अल-हिज्र (हिज्र क्षेत्र — الحجر) (आयत 68)

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15 अल-हिज्र(الحجر), आयत ६८

قَالَ إِنَّ هَٰؤُلَاءِ ضَيْفِي فَلَا تَفْضَحُونِ 68 ٦٨

उसने कहा, "ये मेरे अतिथि है। मेरी फ़ज़ीहत मत करना, (६८)

तफ़सीर
लूत अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : ये लोग मेरे अतिथि हैं। अतः मुझे उस चीज़ के द्वारा अपमानित न करो जो तुम उनके साथ करना चाहते हो।

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