सूरह अन-नहल (मधुमक्खी — النحل) (आयत 25)

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16 अन-नहल(النحل), आयत २५

لِيَحْمِلُوا أَوْزَارَهُمْ كَامِلَةً يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۙ وَمِنْ أَوْزَارِ الَّذِينَ يُضِلُّونَهُمْ بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ أَلَا سَاءَ مَا يَزِرُونَ 25 ٢٥

इसका परिणाम यह होगा कि वे क़ियामत के दिन अपने बोझ भी पूरे उठाएँगे और उनके बोझ में से भी जिन्हें वे अज्ञानता के कारण पथभ्रष्ट कर रहे है। सुन लो, बहुत ही बुरा है वह बोझ जो वे उठा रहे है! (२५)

तफ़सीर
ताकि उनका अंजाम यह हो कि वे बिना किसी कमी के अपने गुनाहों का बोझ उठाएँ और उन लोगों के गुनाहों का भी कुछ बोझ उठाएँ, जिन्हें उन्होंने अज्ञानता और पूर्वजों के अनुकरण में इस्लाम से भटकाया है। तो उनका अपने पापों और अपने अनुयायियों के पापों का बोझ उठाना कितना बुरा है।

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