सूरह अन-नहल (मधुमक्खी — النحل) (आयत 26)

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16 अन-नहल(النحل), आयत २६

قَدْ مَكَرَ الَّذِينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَأَتَى اللَّهُ بُنْيَانَهُمْ مِنَ الْقَوَاعِدِ فَخَرَّ عَلَيْهِمُ السَّقْفُ مِنْ فَوْقِهِمْ وَأَتَاهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ 26 ٢٦

जो उनसे पहले गुज़र है वे भी मक्कारियाँ कर चुके है। फिर अल्लाह उनके भवन पर नीवों की ओर से आया और छत उनपर उनके ऊपर से आ गिरी और ऐसे रुख़ से उनपर यातना आई जिसका उन्हें एहसास तक न था (२६)

तफ़सीर
इनसे पहले भी काफ़िरों ने अपने रसूलों के विरुद्ध साज़िशें कीं, तो अल्लाह ने उनके घरों को उनकी नींव से ध्वस्त कर दिया। इसलिए उनकी छतें उनके ऊपर से उनपर गिर पड़ीं और उनपर वहाँ से यातना आई, जहाँ से उन्हें उम्मीद नहीं थी। क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि उनके घर उनकी रक्षा करेंगे, लेकिन वे उनके द्वारा ही नष्ट कर दिए गए।

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