सूरह अन-नहल (मधुमक्खी — النحل) (आयत 4)

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16 अन-नहल(النحل), आयत ४

خَلَقَ الْإِنْسَانَ مِنْ نُطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُبِينٌ 4 ٤

उसने मनुष्यों को एक बूँद से पैदा किया। फिर क्या देखते है कि वह खुला झगड़नेवाला बन गया! (४)

तफ़सीर
उसने मनुष्य को एक तुच्छ वीर्य की बूँद से पैदा किया। फिर वह एक अवस्था (रचना) के बाद दूसरी अवस्था (रचना) में स्थानांतिरत होकर बढ़ता गया। फिर देखते-देखते वह सत्य को मिटाने के लिए असत्य के साथ खुल्लम-खुल्ला झगड़ने वाला बन गया।

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