सूरह अन-नहल (मधुमक्खी — النحل) (आयत 64)

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16 अन-नहल(النحل), आयत ६४

وَمَا أَنْزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ إِلَّا لِتُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذِي اخْتَلَفُوا فِيهِ ۙ وَهُدًى وَرَحْمَةً لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ 64 ٦٤

हमने यह किताब तुमपर इसीलिए अवतरित की है कि जिसमें वे विभेद कर रहे है उसे तुम उनपर स्पष्टा कर दो और यह मार्गदर्शन और दयालुता है उन लोगों के लिए जो ईमान लाएँ (६४)

तफ़सीर
और (ऐ रसूल!) हमने आप पर यह क़ुरआन इसलिए उतारा है, ताकि आप सभी लोगों के लिए एकेश्वरवाद, मरणोपरांत पुनर्जीवन और शरीयत के अहकाम खोल-खोलकर बयान कर दें, जिनमें उन्होंने मतभेद किया है। और इसलिए कि यह क़ुरआन अल्लाह और उसके रसूलों पर तथा क़ुरआन की लाई हुए बातों पर ईमान रखने वालों के लिए मार्गदर्शक और दया बन जाए। क्योंकि वही सत्य से लाभ उठाने वाले हैं।

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