सूरह मरयम (مريم) (आयत 54)

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19 मरयम(مريم), आयत ५४

وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِسْمَاعِيلَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صَادِقَ الْوَعْدِ وَكَانَ رَسُولًا نَبِيًّا 54 ٥٤

और इस किताब में इसमाईल की चर्चा करो। निस्संदेह वह वादे का सच्च, नबी था (५४)

तफ़सीर
और (ऐ रसूल!) आपपर जो क़ुरआन उतारा गया है, उसमें इसमाईल (अलैहिस्सलाम) के वृत्तांत की चर्चा करें। निश्चय ही वह वचन का पक्का था, जब भी कोई वादा करता उसे ज़रूर पूरा करता था तथा वह रसूल एवं नबी था।

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